चाय की दुकान से बेडरूम तक
भाग 1: चाय की दुकान पर मिली लड़की की चुदाई का सफर: पहली मुलाकात (दिन 1-30)
दिन 1 – वो शाम जब सब शुरू हुआ
बैंगलोर की भीड़ भाड़ वाली सड़क पर, कोरमंगला के पास एक छोटी सी गली में “कृष्णा टी स्टॉल” की एक झोपड़ी सी दुकान थी। शाम के 6:30 बजे थे और आसमान में बादल छाए हुए थे, मानो बारिश का इंतजार कर रहे हों। चाय की दुकान से बेडरूम तक
कबीर अपने PG से निकला था। 24 साल का लड़का, मध्य प्रदेश से आया हुआ, सॉफ्टवेयर इंजीनियर। सफेद कुर्ता और नीली जींस पहने हुए। उसके चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी – पूरे दिन का coding, दो बार build fail होना, और PM की डांट। वो PG का खाना खाकर उब चुका था। दाल में पानी ज्यादा, सब्जी में नमक कम, और रोटियां ऐसी जैसे कागज़ से बनी हों।
वो टी स्टॉल पर रुका। एक कुल्हड़ चाय मांगी। “भैया, अदरक वाली, ज़रा कड़क।”
“एक मेरे लिए भी, कड़क वाली।”
यह आवाज़ उसके पीछे से आई। कबीर मुड़ा। एक लड़की खड़ी थी। करीब 22-23 साल की। सफेद कुर्ती और नीली लेगिंग्स में। उसके बाल खुले थे, हल्की सी गीली शायद पसीने से या शायद बैंगलोर की उमस से। उसके हाथ में एक लैपटॉप बैग था जिस पर “Tech Solutions” का लोगो बना हुआ था।
“PG का खाना?” कबीर ने पूछा, मुस्कुराते हुए।
“कैसे पता चला?” लड़की ने आश्चर्य से पूछा।
“वो लैपटॉप बैग, वो थकी हुई आंखें, और ये वक्त। PG वालों का ही समय होता है बाहर का खाना खाने का।”
“हां यार, वो PG वाली आंटी की दाल… मुझे तो लगता है वो कुत्तों को भी ना खिलाएं तो वो भौंक दें।”
दोनों हंस पड़े।
“मैं कबीर, BTech, MP से।”
“मैं श्वेता, MCA, लखनऊ से।”
“और कहां काम?”
“वो सामने वाला Tech Park, तीसरी बिल्डिंग। तुम?”
“वहीं, दूसरी बिल्डिंग। अरे हम तो पड़ोसी हैं।”
चाय आई। दोनों ने कुल्हड़ उठाए। अदरक की खुशबू तैर रही थी। पहली घूंट ली। आंखें बंद हुईं। सुकून मिला।
“यार ये चाय… ये तो जन्नत है उस PG के खाने के मुकाबले,” श्वेता ने कहा।
“सच बोल रही हो। मैं तो सोच रहा था आज रात भूखा ही सो जाऊं।”
“तुम कहां रहते हो?”
“वो गली में, शिवम PG। तुम?”
“लक्षmi PG, तुम्हारे पास ही।”
“अरे वाह! तो हम तो सच में पड़ोसी हैं।”
वो 15 मिनट बीत गए पता ही नहीं चला। चाय खत्म हुई। दोनों ने पैसे दिए। अलविदा कहा। लेकिन कुछ था जो अधूरा सा लगा।
दिन 3 – दोबारा मुलाकात
शाम 6:30। कबीर टी स्टॉल पर था। जानबूझकर। कहीं दूर से एक नज़र सड़क की ओर थी।
वो आई। आज गुलाबी कुर्ती में। बालों में एक क्लिप लगाई हुई। लैपटॉप बैग वही।
“अरे, तुम?” श्वेता ने मुस्कुराते हुए कहा।
“हां, मैं भी रोज़ आता हूं। यहां की चाय…”
“अच्छी है ना?”
“नहीं, तुमसे मिलने का बहाना है।”
श्वेता ने आंखें बड़ी कर लीं। फिर शरमा कर नीचे देख लिया। गालों पर हल्की सी लाली।
“चलो, आज मेरी तरफ से,” कबीर ने कहा।
“नहीं नहीं, अपनी अपनी।”
“पहली दोस्ती की चाय मेरी तरफ से। बैठो।”
टी स्टॉल के सामने एक लकड़ी का बेंच था। दोनों बैठे। आज बात ज़्यादा हुई।
“तुम्हारा बॉस कैसा है?” श्वेता ने पूछा।
“वो राक्षस है यार। आज फिर 5 बजे meeting डाल दी। कहता है ‘कबीर, ये feature कल चाहिए’। अबे कल तो Saturday है!” चाय की दुकान से बेडरूम तक
“हमारा भी वही हाल। हमारी TL तो पागल है। शाम को 7 बजे mail करती है ‘URGENT’ लिखकर। मैं सोचती हूं क्या urgent है रात को 7 बजे!”
“सच! और वो PG वाली आंटी… कल उसने बैंगन की सब्जी बनाई थी। मुझे लगा कचरा खा रहा हूं।”
“ओह! मेरी आंटी तो रोज़ आलू की सब्जी बनाती है। मुझे लगता है उसके पास सिर्फ आलू का ही बीज है।”
दोनों हंसे। हंसी में कुछ रिश्ता बन रहा था। वो 15 मिनट फिर से 45 मिनट बन गए।
दिन 7 – पहला कनेक्शन
आज बारिश हो रही थी। छोटी छोटी बूंदें। श्वेता अपने PG से निकली थी, छाता लेकर। कबीर पहले से ही टी स्टॉल पर था, भीगा हुआ।
“पागल हो! भीग रहे हो!” श्वेता ने कहा, अपना छाता उस पर किया।
“तुम आओगी, ये सोचकर रुका था,” कबीर ने कहा, पानी की बूंदें चेहरे से झाड़ते हुए।
श्वेता का दिल धड़का। कोई इतना इंतजार करता है उसका?
“चलो, अंदर चलते हैं,” टी स्टॉल वाले ने एक तिरपाल की ओर इशारा किया।
वहां बैठे। करीब। बहुत करीब। छाता एक ही था। कंधे छू रहे थे।
“तुम्हें सर्दी लग जाएगी,” श्वेता ने कहा।
“तुम हो ना,” कबीर ने शायदाना अंदाज़ में कहा।
श्वेता ने नीचे देखा। उसके हाथ कांप रहे थे। नहीं, ठंड से नहीं। कुछ और था।
“कबीर…”
“हां?”
“कुछ नहीं… बस यूं ही।”
“नहीं, बोलो।”
“तुम… अच्छे हो।”
“और तुम… बहुत अच्छी हो।”
उनकी आंखें मिलीं। कुछ सेकंड। फिर हट गईं। लेकिन वो सेकंड कुछ कह गए।
दिन 15 – पहली मुलाकात PG के बाहर
रविवार था। कबीर अपने PG से बाहर निकला, नाश्ता लाने के लिए। श्वेता सामने से आ रही थी, कुछ सामान लेकर।
“अरे! रविवार को भी काम?” कबीर ने पूछा।
“नहीं, बस कुछ कपड़े धुलवाने थे। तुम?”
“नाश्ता। PG में आज पोहा है। मुझे पोहा से नफरत है।”
“मुझे भी! चलो, मैं भी चलूं?”
“सच? चलो!”
वो साथ चले। नाश्ते की एक छोटी सी दुकान पर बैठे। डोसा और सांभर।
“तुम्हारे घर में कौन है?” श्वेता ने पूछा।
“मम्मी, पापा, एक छोटी बहन। तुम्हारे?”
“पापा, मम्मी, और बड़ी बहन। वो शादीशुदा है।”
“मिस करती हो उन्हें?”
“बहुत। रोज़ रात को फोन करती हूं। मम्मी रोती हैं। कहती हैं ‘वापस आ जा’। लेकिन यहां job…”
“समझता हूं। मेरी मम्मी भी वही कहती हैं।”
“कबीर…”
“हां श्वेता?”
“कुछ नहीं… बस तुमसे बात करके अच्छा लगता है।”
“मुझे भी। ये शहर… अकेला कर देता है। तुम हो तो थोड़ा सहज लगता है।”
दिन 20 – पहला Secret
शाम को चाय पीते समय।
“मैं तुम्हें कुछ बताऊं?” श्वेता ने कहा।
“हां बोलो।”
“मैं… मैंने कभी किसी को kiss नहीं किया।”
कबीर ने चाय का कुल्हड़ नीचे रखा।
“सच?”
“हां। स्कूल में थोड़ा बहुत crush था, college में एक लड़का पसंद आया लेकिन… कुछ हुआ नहीं। और यहां आकर तो…”
“मैं समझता हूं।”
“तुम्हारा?”
“एक बार… college में। लेकिन वो… वो कुछ खास नहीं था। बस ऐसे ही, दोस्ती में।” चाय की दुकान से बेडरूम तक
“तुम्हें प्यार हुआ है कभी?”
कबीर ने उसकी आंखों में देखा।
“अब हो रहा है शायद।”
श्वेता का चेहरा लाल हो गया।
“मतलब?”
“मतलब… तुम्हें देखकर अच्छा लगता है। तुम्हारी आवाज़ सुनकर दिल धड़कता है। तुम्हारे PG में जाने के बाद खिड़की से देखता हूं तुम्हारी लाइट कब बुझती है।”
श्वेता ने सिर झुका लिया।
“कबीर… ये…”
“जल्दबाजी है ना? माफ करना।”
“नहीं… मैं भी… मैं भी यही सोचती हूं।”
दोनों चुप रहे। चाय ठंडी हो गई। लेकिन दिल गर्म हो रहे थे।
दिन 25 – पहली बार PG में
कबीर का PG। रविवार का दिन। श्वेता आई थी, Maggi बनाने के बहाने।
“ये तुम्हारा कमरा?” श्वेता ने पूछा, अंदर आते हुए।
“हां। छोटा सा है।”
10×10 का कमरा। एक बेड, एक मेज, एक कुर्सी। दीवारों पर कुछ posters – शिवजी का एक, एक motivation quote, और एक old Bollywood movie का।
“अच्छा है,” श्वेता ने कहा।
“बैठो।”
श्वेता बेड पर बैठी। कबीर Maggi बनाने गया। 5 मिनट बाद लौटा।
“बन गई।”
दोनों ने Maggi खाई। एक कटोरे में। दो चम्मच।
“यार ये PG की Maggi भी अच्छी लग रही है तुम्हारे साथ,” श्वेता ने कहा।
“क्योंकि ये PG की Maggi नहीं है। ये हमारी Maggi है।”
खाना खत्म हुआ। कबीर उठकर बर्तन धोने गया। लौटा तो श्वेता खिड़की से बाहर देख रही थी।
“क्या देख रही हो?”
“वो देखो, चांद।”
कबीर उसके पास गया। बहुत पास। कंधे से कंधा मिला।
“सुंदर है ना?” श्वेता ने कहा।
“हां। लेकिन तुम्हारे मुकाबले कुछ भी नहीं।”
श्वेता मुड़ी। अब वो करीब थे। बहुत करीब। आंखों में आंखें।
“कबीर…”
“हां?”
“डर लग रहा है।”
“मुझसे?”
“नहीं… खुद से। कि कहीं ये सब गलत ना हो जाए।”
“मैं हूं ना।”
कबीर ने हाथ उठाया। श्वेता के गाल को छुआ। नरम त्वचा। गर्माहट।
“तुम्हारी आंखें…” कबीर ने कहा।
“क्या?”
“बहुत खूबसूरत हैं।”
श्वेता ने आंखें बंद कर लीं। कबीर करीब आया। और फिर…
पहला kiss। हल्का सा। होठों पर होठ। 2 सेकंड। फिर हट गए।
श्वेता ने आंखें खोलीं। सांस तेज़ हो गई थी।
“ये… ये पहला था,” उसने कहा।
“मेरे लिए भी पहला सच्चा वाला,” कबीर ने कहा।
दिन 30 – रिश्ते की शुरुआत
“तो हम…?” श्वेता ने पूछा।
“हां। मैं चाहता हूं ये रिश्ता। तुम?”
“मैं भी।”
उस शाम टी स्टॉल पर, दोनों ने हाथ पकड़े। सार्वजनिक रूप से। कोई शर्म नहीं, कोई डर नहीं।
“मेरी गर्लफ्रेंड,” कबीर ने गर्व से कहा।
“मेरा बॉयफ्रेंड,” श्वेता ने मुस्कुराते हुए कहा।
भाग 2: चाय की दुकान पर मिली लड़की की चुदाई का सफर:करीबी रिश्ता (दिन 31-60)
दिन 35 – पहली बार डिनर डेट
कबीर ने एक छोटी सी रेस्टोरेंट बुक की। कोरमंगला में। कैंडल लाइट डिनर नहीं था, लेकिन कोने की टेबल थी, प्राइवेसी थी।
श्वेता आई। आज उसने साड़ी पहनी थी। हल्की नीली, सिंपल सी। बाल खुले। हल्का सा मेकअप। कबीर की सांसें रुक गईं।
“तुम… तुम बहुत सुंदर लग रही हो,” उसने कहा।
“शुक्रिया। तुम भी अच्छे लग रहे हो।”
कबीर ने शर्ट पहनी थी। पहली बार office के अलावा।
खाना आया। दोनों ने साथ में खाया। हाथ मेज के नीचे मिले हुए थे।
“श्वेता…”
“हां?”
“मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं।”
“बोलो।”
“मैं… मैं तुमसे प्यार करता हूं।”
श्वेता ने चम्मच नीचे रखा। आंखें नम हो गईं।
“इतनी जल्दी?”
“पता नहीं। लेकिन हां, ये प्यार ही है। तुम्हारे बिना दिन अधूरा लगता है। तुम्हारी आवाज़ सुनकर ही दिन अच्छा बीतता है।”
“कबीर… मैं भी… मैं भी तुमसे प्यार करती हूं।”
उस रात, रेस्टोरेंट के बाहर, दोनों ने गले लगा। कसकर। बहुत देर तक।
दिन 40 – पहली बार श्वेता का कमरा
श्वेता का PG। उसका कमरा। पहली बार कबीर अंदर आया।
“ये मेरा छोटा सा घर,” श्वेता ने कहा।
कमरा सजा हुआ था। गुलाबी रंग की चादरें। Teddy bear एक कोने में। दीवारों पर परिवार की तस्वीरें।
“अच्छा है। गर्माहट है,” कबीर ने कहा।
“बैठो।”
कबीर बेड पर बैठा। श्वेता पानी लाने गई। लौटी तो कबीर उसकी तस्वीरें देख रहा था।
“ये तुम्हारी मम्मी?”
“हां। और ये पापा।”
“तुम्हारी मम्मी जैसी दिखती हो।”
“सच?”
“हां। वो भी खूबसूरत हैं।”
श्वेता शरमा गई। कबीर के पास आई। बैठ गई। बहुत पास।
“कबीर…”
“हां प्रिये।”
यह पहली बार था जब कबीर ने उसे “प्रिये” कहा।
“कुछ करें?”
“क्या?”
“पता नहीं… बस…”
कबीर ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। फिर धीरे से kiss किया। इस बार लंबा। गहरा। श्वेता ने भी प्रतिक्रिया दी। उसके हाथ कबीर के बालों में चले गए।
5 मिनट तक वो kiss करते रहे। फिर हटे। सांसें तेज़ थीं।
“ये… ये अच्छा लगा,” श्वेता ने कहा, शरमा कर।
“मुझे भी।”
“और करें?”
“अगर तुम चाहो तो।”
श्वेता ने हां में सिर हिलाया।
दिन 45 – पहली बार Intimate Moments
कबीर का कमरा। रात के 9 बजे। PG वाले सब अपने अपने कमरों में।
श्वेता आई थी। आज उसने सलवार कमीज़ पहना था। हल्का गुलाबी रंग।
“आओ,” कबीर ने दरवाज़ा खोला।
अंदर आई। कबीर ने दरवाज़ा बंद किया। लॉक किया।
“डर तो नहीं लग रहा?” कबीर ने पूछा।
“थोड़ा… लेकिन तुम हो ना।”
दोनों बेड पर बैठे। कबीर ने लैंप बंद किया। सिर्फ खिड़की से आती हुई स्ट्रीट लाइट की रोशनी थी।
धीरे से कबीर ने श्वेता को अपनी ओर खींचा। गले लगाया। फिर धीरे से उसके गाल पर kiss किया। फिर आंखों पर। फिर नाक पर। और फिर होठों पर।
यह kiss लंबा था। कबीर ने धीरे से अपनी जीभ श्वेता के मुंह में डाली। श्वेता ने पहले तो चौंकी, फिर वो भी जवाब देने लगी। दोनों की जीभें एक दूसरे से मिल रही थीं। लड़ रही थीं। चूस रही थीं।
“उम्म्म… आह्ह…” श्वेता की आवाज़ निकली।
कबीर का हाथ धीरे से उसकी कमर पर गया। फिर ऊपर बढ़ा। कमीज़ के ऊपर से ही उसके स्तनों को छूने लगा।
“आह्ह… कबीर…” श्वेता ने मुंह हटाया।
“बुरा लगा?”
“नहीं… अच्छा… बहुत अच्छा…”
कबीर ने फिर kiss किया। इस बार और गहरा। उसका हाथ अब श्वेता की कमीज़ के अंदर जाने लगा। पेट को छूते हुए ऊपर बढ़ा।
श्वेता की सांसें तेज़ हो गईं। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
कबीर का हाथ अब उसके ब्रा तक पहुंचा। ऊपर से ही स्तनों को दबाने लगा। नरमी से। धीरे-धीरे।
“ओह्ह… आह्ह… हां…” श्वेता की आवाज़ें निकलने लगीं।
कबीर ने kiss तोड़ा। और धीरे से श्वेता को बेड पर लिटा दिया। खुद उसके ऊपर आ गया।
“श्वेता… मैं…”
“हां… करो… जो करना है…”
कबीर ने धीरे से उसकी कमीज़ के बटन खोलने शुरू किए। एक… दो… तीन…
हर बटन खोलते समय उसकी आंखें श्वेता की आंखों में थीं। श्वेता शर्मा रही थी, लेकिन रोक नहीं रही थी।
कमीज़ खुली। अब सामने सफेद रंग की ब्रा थी। श्वेता के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थीं सांसों के साथ।
“सुंदर हो,” कबीर ने फुसफुसाते हुए कहा।
फिर उसने ब्रा के ऊपर से ही एक स्तन को मुंह में लिया। चूसने लगा। जीभ से निप्पल को रगड़ने लगा।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… कबीर…” श्वेता की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगीं।
कबीर का एक हाथ नीचे गया। सलवार के नाड़े को खोला। धीरे से हाथ अंदर डाला।
श्वेता की yoni गीली थी। कबीर ने उंगली से उसे छुआ।
“ओह्ह माई गॉड… उइ… आह्ह…” श्वेता चिल्लाई।
“क्या हुआ? बुरा लगा?”
“नहीं… बहुत अच्छा… और करो…”
कबीर ने उंगली अंदर डाली। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। दूसरे हाथ से स्तन दबा रहा था।
श्वेता बेड पर तड़पने लगी। उसके मुंह से आवाज़ें निकल रही थीं – “आह्ह… उइ… ओह्ह… हां… और तेज़…”
5 मिनट तक यह सिलसिला चला। फिर श्वेता ने कबीर को रोका।
“रुको…”
“क्या हुआ?”
“मैं… मैं आज… आगे नहीं बढ़ना चाहती।”
कबीर ने तुरंत हाथ हटाया।
“माफ करना… मैंने सोचा…”
“नहीं, तुमने कुछ गलत नहीं किया। बस… मैं तैयार नहीं हूं अभी।”
“कोई बात नहीं। जब तुम तैयार होगी।”
कबीर ने उसे गले लगाया। कसकर। श्वेता रोने लगी।
“सॉरी…”
“पागल हो तुम। रो क्यों रही हो? मैं हूं ना।”
दिन 50 – और करीब
आज श्वेता ने खुद कबीर को बुलाया था।
“आज मैं तैयार हूं,” उसने फोन पर कहा।
“किसके लिए?”
“सबके लिए।”
कबीर का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
शाम को वो आया। श्वेता ने दरवाज़ा खोला। आज उसने नाइटी पहनी थी। हल्की सी, पतली सी।
“आओ,” उसने कहा, शर्माते हुए।
अंदर आए। दरवाज़ा बंद किया। श्वेता ने लैंप बंद किया। सिर्फ एक छोटी सी मोमबत्ती जल रही थी।
“श्वेता… तुम सच में…”
“हां। लेकिन धीरे-धीरे… पहली बार है।”
“मैं समझता हूं।”
कबीर ने उसे गले लगाया। फिर धीरे से kiss किया। लंबा, गहरा। उसका हाथ धीरे से नाइटी के ऊपर से श्वेता की पीठ पर गया। नीचे की ओर बढ़ा। गांड को सहलाने लगा।
“आह्ह…” श्वेता की आवाज़ निकली।
कबीर ने उसे बेड पर लिटाया। खुद उसके बगल में लेट गया। एक हाथ उसके चेहरे पर फिराया। फिर धीरे से नाइटी के बटन खोलने लगा।
एक बटन… दो बटन… तीन…
नाइटी खुली। अंदर कुछ नहीं था। श्वेता ने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी।
“तुम…”
“मैंने सोचा आज…”
कबीर ने नाइटी पूरी उतार दी। अब श्वेता सामने बिल्कुल नंगी लेटी थी। मोमबत्ती की रोशनी में उसका शरीर एक मूरत लग रहा था।
उसके स्तन गोल, मध्यम आकार के। निप्पल गुलाबी, कड़े हो रहे थे। नाभि गहरी। और नीचे… उसकी yoni। हल्के बाल थे। गीली दिख रही थी।
“सुंदर हो… बहुत सुंदर,” कबीर ने फुसफुसाया।
उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। पहले शर्ट। फिर टी-शर्ट। उसका सीना दिखा। हल्के बाल थे। फिर पैंट। और अंदर अंडरवियर।
अंडरवियर के ऊपर से उसका लिंग कड़ा होकर उभर रहा था।
“ये… ये तुम्हारा…” श्वेता ने पूछा, शर्माते हुए।
“हां। मेरा लिंग।”
कबीर ने अंडरवियर उतारा। उसका लिंग बाहर आया। करीब 6 इंच लंबा, मोटा। टोपी लाल हो रही थी।
“ये… ये अंदर जाएगा?” श्वेता ने डरते हुए पूछा।
“हां। लेकिन धीरे-धीरे। पहले तैयारी करूं?”
“कैसी तैयारी?”
कबीर नीचे झुका। श्वेता के पैरों के बीच आ गया। उसने हाथ से उसकी yoni को फैलाया। फिर जीभ से चाटना शुरू किया।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… क्या कर रहे हो…” श्वेता चिल्लाई।
कबीर ने जवाब नहीं दिया। वो चाट रहा था। जीभ से clitoris को रगड़ रहा था। कभी अंदर डाल रहा था।
“आह्ह… उइ… ओह्ह… हां… और… और तेज़…” श्वेता बेड पर तड़प रही थी।
5 मिनट तक यह चला। फिर कबीर ऊपर आया।
“अब तैयार हो?”
“हां… लेकिन धीरे से…”
कबीर ने उसके पैर फैलाए। खुद बीच में आया। उसने अपने लिंग को हाथ में लिया। श्वेता की yoni के मुहाने पर रखा।
“जा रहा हूं…”
धीरे से आगे बढ़ाया। टोपी अंदर घुसी।
“आह्ह… दर्द…” श्वेता ने चिल्लाया।
“रुक जाऊं?”
“नहीं… और थोड़ा…”
कबीर ने और आगे किया। आधा लिंग अंदर गया।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… बहुत बड़ा है…” श्वेता की आंखों से आंसू निकले।
कबीर रुका। उसे kiss किया। फिर धीरे से और आगे किया। पूरा लिंग अंदर।
दोनों एक दूसरे में समा गए। कबीर ने हिलना शुरू किया। धीरे-धीरे। अंदर-बाहर।
“आह्ह… उइ… ओह्ह… हां… अब अच्छा लग रहा…” श्वेता की आवाज़ बदलने लगी।
“सच?”
“हां… और तेज़ करो…”
कबीर ने गति बढ़ाई। अब वो तेज़ी से श्वेता को चोद रहा था। बेड की चरमराहट की आवाज़ आ रही थी।
“फक मी… ओह्ह… हां… और तेज़… उइ… आह्ह…” श्वेता चिल्ला रही थी।
10 मिनट तक यह सिलसिला चला। फिर कबीर ने कहा – “मैं निकलने वाला हूं…”
“मेरे अंदर ही… सुरक्षित दिन है…”
कबीर ने एक ज़ोर का झटका मारा। और फिर उसका वीर्य श्वेता की yoni में बह गया।
“उइ… आह्ह… ओह्ह…” श्वेता ने महसूस किया गर्म तरल को अपने अंदर।
कबीर थक कर श्वेता के ऊपर गिर गया। दोनों की सांसें तेज़ थीं।
“पहली बार था… मज़ा आया?” कबीर ने पूछा।
“बहुत… दर्द हुआ शुरू में, फिर… फिर मज़ा आया,” श्वेता ने मुस्कुराते हुए कहा।
दोनों एक दूसरे में लिपटे रहे। रात भर।
भाग 3: चाय की दुकान पर मिली लड़की की चुदाई का सफर: प्यार की गहराई (दिन 61-90)
दिन 65 – नए Experiments
अब वो अक्सर मिलते थे। कभी कबीर के PG में, कभी श्वेता के PG में। हर बार कुछ नया।
आज कबीर लाया था चॉकलेट सिरप।
“ये क्या है?” श्वेता ने पूछा।
“आज कुछ अलग करेंगे।”
श्वेता ने कुर्ती उतारी। फिर लेगिंग्स। फिर ब्रा। फिर पैंटी। बिल्कुल नंगी खड़ी थी।
कबीर ने चॉकलेट सिरप उसके स्तनों पर डाला। फिर चाटने लगा।
“आह्ह… ठंडा है… उइ…” श्वेता कांप उठी।
कबीर ने नीचे की ओर किया। नाभि में डाला। चाटा। फिर yoni पर।
“ओह्ह… आह्ह… ये… ये अजीब है…” श्वेता हंसी।
कबीर ने चॉकलेट से ढकी yoni को चाटना शुरू किया। मीठा स्वाद।
“उइ… आह्ह… हां… अच्छा लग रहा…” श्वेता ने कहा।
फिर कबीर ने खुद के लिंग पर चॉकलेट लगाई।
“चूसो,” उसने कहा।
श्वेता ने पहले तो हिचकिचाई, फिर धीरे से मुंह में लिया।
“उम्म्म… मीठा…” उसने कहा।
वो चूसने लगी। कबीर के मुंह से आवाज़ निकली – “आह्ह… हां… और… और गहरा…”
दिन 70 – Doggy Style
आज श्वेता ने कहा – “आज पीछे से करेंगे।”
“Doggy style?”
“हां। मैंने internet पर देखा… अच्छा लगता है।”
श्वेता बेड पर घुटनों के बल आ गई। उसकी गांड ऊपर थी। कबीर ने पीछे से उसकी yoni को चाटा। फिर अपना लिंग हाथ में लिया। मुहाने पर रखा।
“जा रहा हूं…”
एक ज़ोर का झटका। पूरा लिंग अंदर।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… ये… ये गहरा जा रहा है…” श्वेता चिल्लाई।
कबीर ने उसकी कमर पकड़ी। तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा।
“फक मी… हार्ड… उइ… आह्ह… ओह्ह…” श्वेता की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं।
कबीर ने एक हाथ आगे किया। उसके स्तनों को पकड़ा। दबाया।
“हां… और तेज़… और… उइ… आह्ह…”
15 मिनट तक यह चला। फिर दोनों एक साथ झड़े।
दिन 75 – Anal Sex की कोशिश
“कबीर… मैं… मैं एक बात पूछूं?”
“पूछो।”
“वो… वो जगह… गांड… वहां भी होता है ना?”
कबीर समझ गया।
“हां। लेकिन वो दर्दनाक हो सकता है पहली बार।”
“मैं… मैं कोशिश करना चाहती हूं।”
“तुम्हें यकीन है?”
“हां। लेकिन बहुत धीरे से।”
श्वेता बेड पर लेट गई। कबीर ने तेल लिया। उसकी गांड के छेद पर लगाया। उंगली से फैलाया।
“आह्ह… ठंडा है…” श्वेता ने कहा।
कबीर ने धीरे से एक उंगली अंदर डाली।
“उइ… अजीब लग रहा है…”
फिर दो उंगलियां। फिर तीन।
“अब तैयार हो?”
“हां… धीरे से…”
कबीर ने अपने लिंग पर तेल लगाया। श्वेता की गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया।
“आह्ह… दर्द… बहुत दर्द…” श्वेता चिल्लाई।
“रुक जाऊं?”
“नहीं… थोड़ा और…”
कबीर ने और आगे किया। आधा लिंग अंदर गया।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… बहुत तंग है…” श्वेता के माथे पर पसीना था।
कबीर रुका। उसे kiss किया। फिर धीरे से हिलना शुरू किया।
“अब… अब ठीक है…” श्वेता ने कहा।
कबीर ने गति बढ़ाई। अब वो उसकी गांड मार रहा था।
“फक मी… हार्ड… उइ… आह्ह… ओह्ह…” श्वेता की आवाज़ें निकल रही थीं।
“कैसा लग रहा है?”
“अजीब… लेकिन… मज़ा आ रहा है… और तेज़ करो…”
कबीर ने पूरी गति से श्वेता की गांड मारी। 10 मिनट बाद वो अंदर ही झड़ गया।
दिन 80 – Role Play
आज श्वेता ने नर्स की वर्दी पहनी थी। सफेद, छोटी सी।
“मिस्टर कबीर, आपकी जांच करनी है,” उसने नाटकीय अंदाज़ में कहा।
कबीर बेड पर लेटा हुआ था।
“डॉक्टर, मुझे… मुझे यहां दर्द है,” उसने अपना लिंग पकड़ा।
“अच्छा? देखती हूं।”
श्वेता नीचे झुकी। उसने नर्स की वर्दी के बटन खोले। अंदर ब्रा नहीं थी। स्तन दिखे।
“ये… ये दवा है,” उसने कबीर का लिंग पकड़ा।
फिर मुंह में लिया। चूसने लगी।
“आह्ह… डॉक्टर… ये… ये दवा अच्छी है…” कबीर ने नाटक जारी रखा।
श्वेता ने वर्दी पूरी उतार दी। सिर्फ नर्स की टोपी पहनी थी। वो कबीर के ऊपर चढ़ गई। खुद yoni में लिंग डाला।
“उइ… आह्ह… अब… अब मैं आपकी सेवा करूंगी…” उसने कहा।
वो ऊपर-नीचे कूदने लगी। कबीर के लिंग पर बैठकर।
“फक मी… हार्ड… उइ… आह्ह… ओह्ह…” दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे।
दिन 85 – Public में
आज वो एक पार्क में थे। रात हो चुकी थी। कोने में एक बेंच।
“यहां?” श्वेता ने डरते हुए पूछा।
“कोई नहीं है,” कबीर ने कहा।
दोनों बैठे। कबीर ने हाथ श्वेता की सलवार में डाल दिया। पैंटी के ऊपर से yoni को सहलाने लगा।
“उइ… यहां नहीं…” श्वेता ने कहा, लेकिन रोका नहीं।
कबीर ने उंगली अंदर डाली।
“आह्ह… कोई आ जाएगा…”
“अंधेरा है… कोई नहीं देखेगा…”
कबीर ने तेज़ी से उंगली अंदर-बाहर की।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं…”
“झड़ जाओ…”
श्वेता ने कसकर कबीर का हाथ पकड़ा। और फिर झड़ गई। पूरी yoni गीली हो गई।
दिन 90 – 69 Position
आज कबीर ने कहा – “आज एक नई चीज़।”
“क्या?”
“69।”
“वो क्या होता है?”
“तुम मेरे मुंह पर बैठो, मैं तुम्हारे। एक साथ।”
श्वेता ने कोशिश की। वो कबीर के मुंह पर बैठी। उसकी yoni कबीर के मुंह पर थी। और कबीर का लिंग उसके मुंह में।
दोनों एक साथ चाट रहे थे, चूस रहे थे।
“उम्म्म… आह्ह… उइ…” श्वेता की आवाज़ें कबीर के लिंग से दबी हुई निकल रही थीं।
“उम्म्म… म्म्म…” कबीर भी आवाज़ें निकाल रहा था।
10 मिनट तक यह चला। फिर दोनों एक साथ झड़े।
भाग 4: चाय की दुकान पर मिली लड़की की चुदाई का सफर: प्यार की पराकाष्ठा (दिन 91-120)
दिन 95 – Threesome की Fantasy
“कबीर… क्या तुमने कभी… दो लड़कियों के साथ… सोचा है?” श्वेता ने पूछा।
“तुम्हारे अलावा किसी के बारे में नहीं सोचता।”
“नहीं, मतलब… fantasy।”
“हां, सोचा है। लेकिन वो सिर्फ fantasy है।”
“मैंने भी सोचा है… दो लड़कों के साथ…”
कबीर ने उसे कसकर पकड़ा।
“वो सिर्फ fantasy। असलियत में मैं सिर्फ तुम्हें चाहता हूं।”
“मैं भी सिर्फ तुम्हें।”
दोनों ने प्यार किया। गहरा, लंबा।
दिन 100 – BDSM की कोशिश
आज कबीर लाया था रस्सी और एक रुमाल।
“ये क्या है?” श्वेता ने पूछा।
“आज तुम मेरी गुलाम हो।”
“कैसे?”
कबीर ने उसके हाथ बांधे। बेड के सिरहाने से। वो बेड पर फैली हुई थी। बंधी हुई।
“अब मैं जो चाहूं करूंगा,” कबीर ने कहा।
उसने श्वेता की आंखों पर पट्टी बांधी। अब वो कुछ नहीं देख सकती थी।
कबीर ने ice cube लिया। उसके स्तनों पर फेरा।
“उइ… ठंडा… आह्ह…” श्वेता कांप उठी।
फिर नीचे yoni पर।
“ओह्ह… ये… ये बहुत…” वो तड़प रही थी।
कबीर ने ice cube मुंह में रखा। फिर उसकी yoni में डाला।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… बर्फ… अंदर…” श्वेता चिल्लाई।
फिर कबीर ने अपना गर्म लिंग अंदर डाला।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… ये गर्म-ठंडा…” श्वेता पागल हो रही थी।
कबीर ने तेज़ी से उसे चोदा। बंधी हुई श्वेता बेड पर तड़प रही थी।
“फक मी… हार्ड… उइ… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं झड़ने वाली हूं…”
कबीर ने और तेज़ किया। और फिर दोनों एक साथ झड़े।
दिन 105 – Mirror में Sex
कबीर ने एक बड़ा आईना लगाया था बेड के सामने।
“आज देखेंगे हमें,” उसने कहा।
श्वेता घुटनों के बल आईने के सामने थी। कबीर पीछे से उसकी yoni मार रहा था।
“देखो… देखो हमें…” कबीर ने कहा।
श्वेता ने आईने में देखा। उसने देखा कैसे कबीर का लिंग उसकी yoni में अंदर-बाहर हो रहा है।
“उइ… ये… ये देखकर अच्छा लग रहा है…” उसने कहा।
“हां… देखो… देखो मैं तुम्हें कैसे चोद रहा हूं…”
“फक मी… हार्ड… उइ… आह्ह… ओह्ह…”
दोनों आईने में देखते हुए सेक्स कर रहे थे। यह और भी उत्तेजित कर रहा था।
दिन 110 – Food Sex
आज टेबल पर फल थे – केला, अंगूर, स्ट्रॉबेरी।
कबीर ने केला लिया। उसे श्वेता की yoni के अंदर डाला।
“उइ… ये क्या कर रहे हो…” श्वेता हंसी।
फिर कबीर ने वो केला निकाला। खाया।
“मीठा है… तुम्हारे रस के साथ…”
फिर अंगूर एक-एक करके अंदर डाले। निकाले। खाए।
“ये… ये बहुत गंदा है…” श्वेता शरमा रही थी, लेकिन मज़ा आ रहा था।
दिन 115 – Outdoor Sex
वो एक छोटी सी यात्रा पर गए थे। निकटतम शहर के बाहर एक छोटा सा रिज़ॉर्ट।
रात में, तारों के नीचे, एक खुली जगह।
“यहां?” श्वेता ने पूछा।
“कोई नहीं है।”
कबीर ने उसे घास पर लिटाया। उसके कपड़े उतारे। खुद भी नंगा हुआ।
आसमान में तारे। नीचे वो दोनों एक दूसरे में समाए।
“उइ… आह्ह… ये… ये अलग है…” श्वेता ने कहा।
“प्रकृति के बीच…”
कबीर ने उसे धीरे-धीरे चोदा। तारों की रोशनी में उनके शरीर चमक रहे थे।
“फक मी… ओह्ह… हां… उइ… आह्ह…”
दिन 120 – Anniversary
3 महीने पूरे हो गए थे।
कबीर ने श्वेता के लिए एक छोटी सी अंगूठी लाई थी।
“ये… ये क्या है?” श्वेता ने पूछा।
“ये हमारे प्यार की निशानी है।”
श्वेता रोने लगी।
“मैं… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं कबीर।”
“मैं भी।”
उस रात, वो प्यार से, धीरे-धीरे, एक-दूसरे को महसूस करते हुए, एक-दूसरे में समाते हुए, रात भर एक दूसरे के बने रहे।
“उइ… आह्ह… ओह्ह… मैं… मैं तुम्हारी हूं कबीर… हमेशा…” श्वेता ने कहा।
“और मैं तुम्हारा… हमेशा…”
भाग 5: हमेशा के लिए (दिन 121-150)
दिन 130 – Moving In Together
उन्होंने एक छोटा सा अपार्टमेंट लिया। एक बेडरूम। एक छोटा सा किचन। एक बाथरूम।
“ये हमारा घर,” कबीर ने कहा।
“हमारा घर,” श्वेता ने दोहराया।
पहली रात, उन्होंने फर्श पर ही, बिना बिस्तर के, एक-दूसरे को प्यार किया।
“उइ… आह्ह… ये… ये हमारा घर… हमारा बेड… हमारा प्यार…” श्वेता ने कहा।
“हां… अब हमेशा साथ…”
दिन 140 – Morning Sex की आदत
अब हर सुबह एक नई आदत बन गई।
कबीर सुबह उठता। श्वेता अभी सो रही होती। वो धीरे से उसके कपड़े उतारता। उसकी yoni को चाटता। जगाता।
“उइ… सुबह-सुबह…” श्वेता मुस्कुराती।
“तुम्हारी योनि का स्वाद… दिन की शुरुआत के लिए बेहतर कुछ नहीं।”
फिर वो उसे चोदता। धीरे से। प्यार से।
“आह्ह… उइ… ओह्ह… गुड मॉर्निंग…” श्वेता कहती।
अब मुझे दूसरे सहर जाना पड़ा, अब मेरी कभी-कभी उससे बात होती है, लेकिन आज भी वो पीजी वाले दिन और साथ में लिया अपार्टमेंट, भूत याद आता है और मुझे बहुत याद आता है, अगर आपको मेरी कहानी अपनी जैसी लगे तो कृपया कमेंट करें, जिसमें और कहानियां लिखें जो मेरी लखनऊ में घाटी सिद्धि के साथ सेक्स स्टोरी शेयर कर सकते हैं
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